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دشتها نام تو را می گویند |
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باران شیشه ی پنجره را باران شست. از دل من اما چه کسی نفش تو را خواهد شست؟ آسمان سربی رنگ من درون قفس سرد اتاقم دلتنگ می پرد مرغ نگاهم تا دور وای باران باران پر مرغان نگاهم را شست. خواب رویای فراموشیهاست! خواب را در یابم که در آن دولت خاموشیهاست. من شکوفایی گلهای امیدم را در رویاها می بینم و ندایی که به من می گوید: گر چه شب تاریک است دل قوی دار سحر نزدیک است |
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دشتها آلوده ست |
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یادش به خیر دلبر روشن ضمیر ما |
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تکه ای از دل خود را در دست ! |
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ای آخرین رنج |
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ای شب ، به پاس صحبت دیرین ، خدای را با او بگو حکایت شب زنده داریم |
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تا در این دهر دیده کردم باز |
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بر زمین افتاده پخشیده ست |
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من به درماندگی صخره و سنگ |
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روزی اگر سراغ من آمد به او بگو |
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